महामहोपाधयचर्य पुष्पा दीक्षित

राष्ट्रिय स्तर की संस्कृत संगोष्ठियों में प्रतिभागिता तथा शोध पत्र अखिल भारतीय स्तर की विभिन्न संगोष्ठियों में शताधिक शोध पत्रों का वाचन किया है। जिनमें से अनेक शोधपत्र प्रकाशित हैं। अखिल भारतीय प्राच्य विद्या सम्मेलन (आल इण्डिया ओरिएण्टल कांफ्रेस) जो प्रति दो वर्ष में राष्ट्र के भिन्न भिन्न स्थानों पर होता है, में नियमित सदस्य के रूप में सक्रिय भाग लेती हैं। पुष्पा दीक्षित ने प्रत्येक सम्मेलन में भाषा विज्ञान और व्याकरण पर नियमित रूप से गत शोधपत्र पढ़े हैं। दिल्ली, सागर, इलाहाबाद, वाराणसी, लखनऊ आदि देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में आयोजित सेमीनार में आपकी सक्रिय प्रतिभागिता होती रही है।
राष्ट्रिय स्तर के संस्कृत कवि समवायों में प्रतिभागिता प्रायः सभी अखिल भारतीय संस्कृत कवि सम्मेलनों में आप आमन्त्रित रहती हैं। उल्लेखनीय है कि 13 वें विश्व संस्कृत सम्मेलन जो स्काटलैण्ड के एडिनबरा विश्वविद्यालय में आयोजित था उसमे काव्यपाठ के लिये भारत से 15 राष्ट्रिय संस्कृत कवियों का चयन किया गया था। उन 15 मूर्धन्य कवियों में एक नाम डॉ. पुष्पा दीक्षित का भी था। प्रतिवर्ष की भाँति इस वर्ष भी अखिल भारतीय कालिदास समारोह में आपको कवि के रूप में आमन्त्रित किया गया है।
शोध कार्य आपके निर्देशन में अनेक छात्रों ने शोधोपाधि प्राप्त की है।
संस्कृत के हित में सतत कार्य कोसल संस्कृत समिति की अध्यक्षा श्रीमती डॉ. पुष्पा दीक्षित संस्कृत भाषा के प्रति सर्वतोभावेन समर्पित हैं। उनके द्वारा शासन का ध्यान निरन्तर संस्कृत भाषा के उन्नयन और नीति निर्धारण के विषय में आकर्षित किया जाता है। आपका एक अपना लगभग 10000 पुस्तकों का पुस्तकालय है जिसमें लगभग संस्कृत वाङ्मय की पुस्तकें हैं जहाँ आकर शोधच्छात्र अपने विषयों से सम्बन्धित पुस्तकों का अवलोकन कर सकते हैं। जन साधारण में संस्कृत की रुचि बढ़ाने के लिये, संस्कृत भाषा के प्रति जागरूकता बढाने के लिये वे निरन्तर गीतापाठ, स्तोत्रपाठ तथा शुद्ध संस्कृत उच्चारण की शिक्षा स्थानीय लोगों को निःशुल्क देती रहती हैं। रामायण, गीता और भागवत के प्रवचनों के माध्यम से भी आप लोगों को संस्कृत भाषा के प्रति जागरूक करती रहती हैं। आपका विश्वास है कि संस्कृत से ही भारत की पहिचान है अतः संस्कृत भाषा को जन जन तक पहुँचाना ही आपके जीवन का एकमात्र लक्ष्य है।
छत्तीसगढ़ में दो संस्कृत विद्यालयों की स्थापना 1. डॉ. पुष्पा दीक्षित ने स्थानीय लोगों के सहयोग से वर्ष 2002 में ग्राम अड़भार, पेण्ड्रा जिला बिलासपुर में एक संस्कृत विद्यालय ”वासुदेव वैदिक संस्कृत विद्यापीठ” की स्थापना की है। जहाँ इस सत्र में 67 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, जिनके निःशुल्क भोजन आवास शिक्षण आदि की व्यवस्था जनसहयोग से की जा रही है। यद्यपि वह संस्था का पृथक् रूप से पंजीयन है तथापि वर्तमान में उस संस्था की संरक्षक एवं अध्यक्षा डॉ. पुष्पा दीक्षित ही हैं। जिनके सद्प्रयासों से संस्था सुचारु रूप से गत पाँच वर्षों से कार्यरत है। 2. आपके ही सत्प्रयासों से 2004 में महामाया ट्रस्ट रतनपुर द्वारा एक वैदिक संस्कृत विद्यालय की स्थापना की गयी है। संस्कृत की रक्षा से राष्ट्र की रक्षा’ इस आदर्श को लेकर उन्होंने सारा जीवन बिताया है। अतः आचार्या पुष्पा दीक्षित का समग्र जीवन संस्कृत के लिये समर्पण का एक उच्च आदर्श है।