:: पाणिनिशाला ::

पाणिनिशाला का आयोजन प्रतिवर्ष किया जाता है, वर्तमान में यह पाणिनिशाला हाईब्रीड मॉड (ऑनलाइन तथा ऑफलाइन) में आयोजित की जा रही है। इच्छुक प्रतिभागी विस्तृत जानकारी हेतु क्लिक करें -

व्याकरणशास्त्र में नवीन उद्भावना


लौकिक, वैदिक उभय शब्दों का साधक होने के कारण वेदों की रक्षा का उपायभूत पाणिनीय व्याकरणशास्त्र सारे वेदाङ्गों में प्रधान है। इसे पढ़ने की दो पद्धतियाँ प्रचलित हैं - एक पद्धति है, पाणिनीय अष्टाध्यायी के सूत्रों के अर्थों को पाणिनीय अष्टाध्यायी क्रम से पढ़ना। इस पद्धति में यह दोष है कि प्रक्रिया को जानने के लिये पूरी अष्टाध्यायी को जानना पड़ता है, साथ ही इसमें अनेक प्रकरणों का व्यामिश्रण हो जाता है, अधिकार, अनुवृत्ति और सूत्रों का पूर्वापर विज्ञान 'अष्टाध्यायी' के प्राण हैं। दूसरी पद्धति है "प्रक्रियापद्धति" इसमें एक लक्ष्य को लेकर सूत्र उपस्थित किये जाते हैं। इससे वह लक्ष्य तो सिद्ध हो जाता है, किन्तु सूत्र का शेष भाग अव्याख्यात ही रह जाता है। प्रक्रियाग्रन्थ पहिले 'प्रयोग' को सामने रख लेते हैं। उस प्रयोग के लिये सारे सूत्र लाकर वहाँ खड़े कर देते हैं। इससे 'अष्टाध्यायी' की व्यवस्था भग्न होती है और 'अधिकार सूत्रों' का मर्म स्पष्ट नहीं हो पाता। अतः इन दो पद्धतियों के रहते हुए 'पाणिनीय अष्टाध्यायी' के विज्ञान को स्पष्ट करते हुए एक प्रयोग को बनाने की प्रक्रिया बतलाकर उसके समानाकृति सारे प्रयोगों को उसी स्थल पर दर्शाकर इदमित्थम् बतला देने वाली पद्धति अभीष्ट थी, जिससे समग्र 'अष्टाध्यायी' अत्यल्प काल में हृद्गत हो सके। इस तीसरी पद्धति का आविष्कार आचार्या पुष्पा दीक्षित ने किया है। वस्तुतः पाणिनिशास्त्र गणितीय विधि पर आश्रित है और पुष्पा दीक्षित ने उस विधि का आविष्कार किया है, अतः पाणिनीय व्याकरण पर पुष्पा दीक्षित का यह कार्य वस्तुतः एक क्रान्ति है।

कार्यक्षेत्र

प्रकाशन

व्याकरण कृतियाँ में अष्टाध्यायी सहज बोध (1-4), नव्यसिद्धान्तकौमुदी 13 भागों में इत्यादि 50 से अधिक अद्वितीय ग्रन्थ लिखे हैं तथा साहित्य कृतियाँ में अग्निशिखा (गीतिकाव्य) तथा शाम्भवी (गीतिकाव्य) प्रमुख हैं।

Read More >>

पाणिनीय शोध संस्थान

आचार्या पुष्पा दीक्षित द्वारा संस्कृत व्याकरण के अध्ययन, संरक्षण तथा प्रचार प्रसार में सन्नद्ध इस संस्था को वर्ष 2000 में स्थापित किया गया जो वर्षभर व्याकरण अध्ययन-अध्यापन का प्रमुख केन्द्र है।

Read More >>

पाणिनिशाला

डॉ. पुष्पा दीक्षित द्वारा पाणिनीय शोध संस्थान के तत्त्वावधान में वर्ष 2002 से प्रतिवर्ष पाणिनिशाला का आयोजन किया जाता है जिसमें सरल विधि से व्याकरण अध्ययन के हेतु देश भर से छात्र तथा प्राध्यापक उपस्थित होते हैं।

Read More >>

कोसल संस्कृत समिति

कोसल प्रदेश में आचार्या पुष्पा दीक्षित द्वारा संस्कृत तथा संस्कृति के संरक्षण तथा प्रचार प्रसार में सन्नद्ध इस संस्था को वर्ष 2006 में स्थापित किया गया जिसका प्रमुख उद्देश्य संस्कृत शिक्षण और अध्ययन-अध्यापन को संवर्धित करना है।

Read More >>

वीडियो प्रदर्शनी


प्रकाशित ग्रन्थ


कॉपीराइट © 2014 डॉ. पुष्पा दीक्षित (सभी अधिकार सुरक्षित) । संयोजक एवं समन्वयक : डॉ. अभिजित् दीक्षित