व्याकरण कृतियाँ -
अष्टाध्यायी सहज बोध प्रथम खण्ड (तिङन्त - सार्वधातुक लकार) ।प्रतिभा प्रकाशन, दिल्ली । प्रक्रियानुसारी-पाणिनीयधातुपाठः ।संस्कृतभारती द्वारा । तिङन्तकोषः - तीन भाग ।इसमें सार्वधातुक तथा आर्धधातुक लकारों को पृथक् पृथक् कर दिया गया है। प्रथम खण्ड में लट्, लोट्, लङ् और विधिलिङ् लकार हैं तथा द्वितीय खण्ड में शेष सारे लकार और प्रक्रियाएँ हैं । प्रतिभा प्रकाशन, दिल्ली । इडागमः ।संस्कृतभारती द्वारा ।
अष्टाध्यायी सहज बोध द्वितीय खण्ड (तिङन्त - आर्धधातुक लकार) ।प्रतिभा प्रकाशन, दिल्ली । आर्धधातुक प्रत्ययों की इडागम व्यवस्था ।प्रतिभा प्रकाशन, दिल्ली । कृदन्तकोषः - दो भाग ।यह कृदन्तकोष पाणिनि की उत्सर्गापवाद पद्धति से बना है । आज तक उपलब्ध सारी रूपावलियाँ अथवा कोष धातुओं को अकारादि क्रम से रखकर बनाये गये हैं, जो कि अत्यन्त अवैज्ञानिक है । इस कृदन्तकोष में अजन्त धातुओं के अन्तिम अक्षर को वर्णमाला के क्रम से रखाकर गया है तथा हलन्त धातुओं को उपधा के क्रम से रखा गया है । प्रतिभा प्रकाशन, दिल्ली । पाणिनीयधातुपाठः ।संस्कृतभारती द्वारा ।
अष्टाध्यायी सहज बोध तृतीय खण्ड (कृदन्त) ।प्रतिभा प्रकाशन, दिल्ली । पाणिनीयधातुपाठः - सार्थः ।इसमें अनेक धातुपाठों के अर्थों का अवलोकन करके प्रत्येक धातु का विस्तट्ठत अर्थ दिया गया है। यथाशक्य प्रयोग भी दिये गये हैं । संस्कृतभारती द्वारा । णिजन्तकोष: ।संस्कृतभारती द्वारा । सनाद्यन्तधातुपाठः ।इसमें सारे पाणिनीय धातुओं के सनाद्यन्त धातु बनाकर दे दिये गये हैं । संस्कृतभारती द्वारा ।
अष्टाध्यायी सहज बोध चतुर्थ खण्ड (तद्धित) ।प्रतिभा प्रकाशन, दिल्ली । तिङ्कृत्कोषः प्रथमः - सार्वधातुकखण्डः ।संस्कृतभारती द्वारा । सन्नन्तकोष: ।संस्कृतभारती द्वारा । लकारसरणिः (चत्वारो भागाः) ।संस्कृतभारती द्वारा ।
प्रकरणनिर्देशसमन्वितः महर्षिपाणिनिप्रणीतः - अष्टाध्यायीसूत्रपाठः । इसमें समग्र अष्टाध्यायी के अधिकारों तथा प्रकरणों को शीर्षक देकर निबद्ध कर दिया गया है। साथ ही इसके सारे विषयों को अकारादिक्रम से सूचीबद्ध कर दिया गया है, जिससे कि सारी अष्टाध्यायी हस्तामलकवत् हो गई है । संस्कृतभारती द्वारा । तिङ्कृत्कोषः द्वितीयः - आर्धधातुकखण्डः । संस्कृतभारती द्वारा । यङन्तकोष: ।संस्कृतभारती द्वारा । शीघ्रबोधव्याकरणम् ।उच्चतर माध्यमिक तथा महाविद्यालयीन कक्षाओं के संस्कृत के विद्यार्थियों के लिये संस्कृत व्याकरण पढ़ने हेतु पाणिनीयविज्ञानानुसार रचित सरलतम व्याकरण ग्रन्थ । प्रतिभा प्रकाशन, दिल्ली ।
सस्वर: पाणिनीयधातुपाठ: (सार्वधातुप्रत्ययोपयोगी) ।संस्कृतभारती द्वारा । धात्वधिकरीयं सामान्यमङ्गकार्यम् ।धात्वधिकार में वर्णित सभी तिङन्त तथा कृदन्त प्रत्ययों के लिये सामान्य अङ्गकार्य वर्णित है। यङ्लुगन्तकोष: ।संस्कृतभारती द्वारा ।
सस्वर: पाणिनीयधातुपाठ: (आर्धधातुप्रत्ययोपयोगी) ।संस्कृतभारती द्वारा । नव्यसिद्धान्तकौमुदी 13 भागों में - स्वरप्रक्रियाविज्ञान सहित 6 भाग ।यह कार्य राष्ट्रिय संस्कृत संस्थान की परियोजना के अन्तर्गत किया जा रहा है। सिद्धान्तकौमुदी में पाणिनीयक्रम का व्युत्क्रम होने से होने वाली विसंगतियों को हटाकर इसमें पाणिनीयक्रम का अवलम्ब लेकर कार्य किया जा रहा है। इससे एक रूप का ज्ञान होने से उसके समानाकार सारे रूपों का परिज्ञान स्वयं ही हो जायेगा।
साहित्य कृतियाँ -
अग्निशिखा (गीतिकाव्य) ।सन् 1984 में संस्कृत गीतिकाव्य "अग्निशिखा" का प्रणयन तथा प्रकाशन। इस गीतिकाव्य में एक ही रस विप्रलम्भ शट्ठङ्गार पर आश्रित 50 सर्वथा छन्दोबद्ध तथा रसाभिभूत कर देने वाले, भारत के मूर्धन्य संस्कृत विद्वानों के द्वारा प्रशंसित गीत हैं। जिसमें सारे गीत एक ही रस पर आश्रित हों, ऐसा यह प्रथम संस्कृत गीतिकाव्य है। शाम्भवी (गीतिकाव्य) ।यह भी संस्कृतगीतिकाव्य है। इसके गीतों में वर्तमान सामाजिक विसंगतियों पर तीक्ष्ण अधिक्षेप है। मध्यप्रदेश संस्कृत अकादमी की पत्रिका दूर्वा में इसके अनेक गीत प्रकाशित हैं। यह पुस्तक शीघ्र प्रकाश्य है। सौन्दर्यलहरीअनुवाद और व्याख्या। अपराजितवधूमहाकाव्यम्डॉ. पूर्णचन्द्र शास्त्री रचित 'अपराजितवधू' संस्कृत महाकाव्य का सम्पादन और अनुवाद।
बहुमाध्यम कृतियाँ -
तिङन्तसिद्धिः - (10 लकार रूपसिद्धि) प्रतिभा प्रकाशन, दिल्ली । अष्टाध्यायी की अध्ययन पद्धति उच्च शिक्षा अनुदान आयोग द्वारा 'ज्ञान दर्शन' (72 एपीसोड) । तिङन्तप्रक्रियाउच्च शिक्षा अनुदान आयोग द्वारा 'ज्ञान दर्शन' (78 एपीसोड) ।
प्रकाश्य ग्रन्थ -
अष्टाध्यायी सहज बोध के पंचम, षष्ठ, सप्तम, अष्टम खण्ड । परिभाषेन्दुशेखर की बहुतर परिभाषाओं की अन्यथासिद्धि । नव्यसिद्धान्तकौमुदी के 7 भाग । सिद्धान्तकौमुदी की वृत्तियों का अष्टाध्यायीक्रम से व्यवस्थापन ।